फकत रोने से काम नहीं चलता है,
अत्याचार तो अत्याचार है, सबको खलता है
प्रतिकार करो , मत करो सहन
क्षमता से अपनी जीतो दिल
बात पते की कहती हूं,
अत्याचार सहना बढ़ावा है
एक और अत्याचार को बहन..
अत्याचार
Comments
26 responses to “अत्याचार”
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👌✍✍
बहुत अच्छा-
Thank you Rishi ji
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सुंदर विचार
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बहुत बहुत धन्यवाद मोहन जी🙏
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”प्रतिकार करो , मत करो सहन
क्षमता से अपनी जीतो दिल”.
बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ, जबरदस्त प्रतिभा है। सटीक लिखती हैं आप। वाह वाह-
समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सर।आपकी प्रेरक समीक्षा हेतु बहुत बहुत आभार 🙏
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उम्दा लेखन
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बहुत बहुत धन्यवाद कमला जी 🙏
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Wow, great
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Thanks a lot chandra ji🙏
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बहुत बढ़िया
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सादर धन्यवाद सर 🙏
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प्रेरक पंक्तियाँ
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समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष जी 🙏
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Atisunder
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏
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True line
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Thank you ji
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Bahut achcha pratibha
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बहुत बहुत धन्यवाद ईशा जी🙏
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अतिसुंदर विचार
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धन्यवाद जी
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VERY NICE
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Thanks for your nice complement Indu ji🙏
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सुन्दर भाव
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Thank you
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