चलो ऐसा एक ज़हान बनाएं,
जहां नहीं होगी ,
आदमी को आदमी से नफरत,
नेकी की राह, नेकी हो सबमें,
प्रेम हो सबसे, प्यार की हसरत,
कदर करता हो, जहां हर कोई ,
हर किसी के मान की,
कौन छोटा !कौन बड़ा!
बस उम्र बताएं,
हैसियत ना किसी को ,
बड़ा बनाएं,
मानवता जहां अपनी पहचान दिखाएं,
चलो ऐसा एक जहान बनाएं।
चलो ऐसा एक ज़हान बनाएं
Comments
13 responses to “चलो ऐसा एक ज़हान बनाएं”
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nice
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Thank you
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Very nice
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Thank you ma’am
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बहुत सुंदर विचार
अतिसुंदर पंक्तियां-

हार्दिक धन्यवाद
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Nice line
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Thank you so much pragya ji
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Atisunder kavita
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हार्दिक धन्यवाद सर
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बहुत उम्दा
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बहुत बहुत आभार
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बहोत सही सही लिखी है.
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