अधूरे अरमानों की झांकी

अधूरे अरमानों की झांकी आज गुजरी मेरे दरम्यां से
इक जिंदगी जो जी नहीं, वो देखी आज मैनें

Comments

4 responses to “अधूरे अरमानों की झांकी”

  1. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

  2. अतिसुन्दर, वाह

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