जलता धागा

जब जलता जाए धागा,
इक रौशनी के वास्ते
ये देख कर..
मोम ने भी ली नसीहत,
और पिंघलना सीख गया ..

*****✍️गीता

Comments

12 responses to “जलता धागा”

  1. बहुत खूब, waah

    1. Geeta kumari

      Thanks for your valuable compliment Joshi ji.

  2. बहुत ही खूबसूरत भाव हैं। कवि ने त्याग और एक दूसरे का साथ देकर संसार में नई रोशनी जगाने की प्रेरणा दी है। काबिलेतारीफ रचना।

    1. Geeta kumari

      सुन्दर समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी ।आपकी प्रेरक समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत आभार 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया भाई जी🙏

  3. उच्चस्तरीय लेखनी है गीता जी आपकी

    1. Geeta kumari

      बहुत सारा धन्यवाद है आपका कमला जी 🙏 कविता की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया,आभार

  4. क्या बात है बहुत सुन्दर पंक्तियां

    1. Thanks for your precious compliment.

  5. This comment is currently unavailable

    1. Geeta kumari

      Thanks bro.

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