6 Comments

  1. कवि सतीश जी ने सांझ का बहुत ही मनोरम चित्रण किया है ।
    पर्वतों की सांझ ,और धीरे धीरे होता अंधेरा बहुत ही सुंदर लग रहा है ।
    समय के सदुपयोग करने की बहुत अच्छी बात भी कही है ।
    प्राकृतिक सौंदर्य की बहुत ही शानदार प्रस्तुति

  2. सतीश जी जिस प्रकार आपने सांस का मानवीकरण करके उसका मनोरम चित्रण किया है वह काबिले तारीफ है प्राकृतिक सौंदर्य को व्यक्त करने का और लिखने का जो जिम्मा आपने उठाया है वह सार्थक सिद्ध हुआ है बहुत ही खूबसूरत और लाजवाब रचना है ऐसे ही लिखते रहिए

Leave a Reply