ये कश्मीर है..

ये कश्मीर है,
कहते हैं, धरती का स्वर्ग इसे
पर कहां रहा ये स्वर्ग अभी,
बदल गई इसकी तस्वीर है
चप्पे-चप्पे पर सैनिक खड़े हैं,
फ़िर भी आतंकवादी यहां आकर लड़े हैं
शॉल, फिरन मिलें सुंदर यहां पे,
केसर, अख़रोट,सेब हैं उम्दा यहां के
डल-झील की अनुपम छटा है,
चिनारों का ऐसा सौन्दर्य और कहां है
अनुपम,अनूठा दृश्य हुआ जब,
कोमल-कोमल बर्फ गिरी
सुन्दर स्थान का नाश किया,
ये कैसा उपहास किया
देख के दिल तो जलता है,
अब आतंक ही यहां पर पलता है
बस अब तो प्रभु से ये अरदास करें,
पहले सा कश्मीर हो,
लोग चैन से इसमें वास करें ।

*****✍️गीता

Comments

12 responses to “ये कश्मीर है..”

  1. बहुत सुंदर लिखा है गीता जी

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका पीयूष जी 🙏

    1. Geeta kumari

      Thanks for your precious compliment pragya.

  2. बहुत खूब अतिसुन्दर

    1. Geeta kumari

      आपका बहुत बहुत धन्यवाद कमला जी🙏

  3. Satish Pandey

    कश्मीर है,
    कहते हैं, धरती का स्वर्ग इसे
    पर कहां रहा ये स्वर्ग अभी,
    बदल गई इसकी तस्वीर है
    कवि गीता जी की लेखनी से प्रस्फुटित अत्यंत सुंदर और यथार्थ पर आधारित रचना है। बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      . आपकी दी हुई इस प्रेरक समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी . बहुत बहुत आभार सर 🙏

  4. This comment is currently unavailable

    1. Geeta kumari

      कविता की सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद भाई.

  5. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत खूब आशावादी काव्य धारा

    1. सादर धन्यवाद भाई जी बहुत बहुत आभार 🙏

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