5 Comments

  1. कवि प्रज्ञा जी की प्रेम से परिपूर्ण अति सुन्दर कविता ।
    अनुप्रास अलंकार ने इसकी छटा में चार चांद लगाए हैं
    बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुतिकरण.

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