अब मेरी
कलम में वो
बात नहीं रही
दिल के अल्फाजों में
वो बात नहीं रही…
लिखने को तो
लिख देते हैं
टूटी-फूटी शायरी
पर जो बात
पहले की कविताओं में
हुआ करती थी
वो बात नहीं रही…
**मेरी कलम**
Comments
6 responses to “**मेरी कलम**”
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. वाह प्रज्ञा जी बहुत खूब👌
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Thanks
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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अतिसुंदर
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Thanks
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