सुंदर दिखना सबको भाता,
हे जीवन के भाग्य विधाता ।
तन की काया कुछ पल सुंदर ,
मन की माया हर पल सुंदर ।
तन सुंदर पर मन न हो कोमल,
वह कुटिल मानव जैसा पुष्प सेमल,
मन कोमल तन है काला,
रहे हरदम मधु पान मसाला ।
सुंदर चित की बात निराली,
तन कलुषित फिर भी साथी यह माली ।
सुंदर दिखना सबको भाता,
हे जीवन के भाग्य विधाता ।
तन के सुंदर, पर मन के जाली,
दुराचार और बने व्यभिचारी ।
तन के कलुषित मन के निराले,
दया करुणा के सागर मतवाले ।
सुंदर दिखना सबको भाता,
हे जीवन के भाग्य विधाता ।
सुंदरता
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One response to “सुंदरता”
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मजबूत शिल्प
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