61 Comments

  1. त्रेता में केवल एक रावण था।। पर
    कलयुग में रावण की कमी नही ..घर घर मे …है
    समाज को उंगली दिखलाती सच्ची कविता।

  2. बहुत ही अच्छी कविता है। वर्तमान समय मे घर घर मे रावण बैठा ।तो हम सभी को राम जैसे सत्य आदर्शो पर चलने बाले सभ्य समाज की जरूरत है।

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