10 Comments

  1. बहुत ही सुंदर से आपने कविता की पंक्तियों को सजाया है। जरा एक पंक्ति में “हो”शब्द की कमी हो गई है। जैसे– पर “चाय की मीठी प्यास – हो – तूम।” हो ” शब्द की कमी थी। रचना बहुत ही सुन्दर भाव में आपने प्रेषित की है।

    1. सही कहा सर..
      जल्दबाजी में यह पंक्ति मैं ने बदल दी थी और हो’ छूट गया…धन्यवाद

  2. “हमारे बीच है मीलों तक की दूरी
    पर साँसों से भी ज्यादा पास हो तुम..”
    जब मन में प्रेम हो तो मीलों की दूरी मायने नहीं रखती है,
    श्रृंगार रस में वियोग की बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    बहुत सुंदर रचना ।

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