8 Comments

  1. “हवा से कहूँ जा खबर ले के आजा किस तरह से उनके दिन कट रहे है
    किसी अपने के हालचाल जानने के लिए कवि सतीश जी ने बहुत ही खूबसूरती से हवा का मानवीकरण किया है । सुन्दर शिल्प और कविता की लय बद्ध शैली ने कविता में और भी निखार ला दिया है
    श्रृंगार रस में वियोग पक्ष का बहुत सुन्दर प्रस्तुतिकरण

    1. इस लाजवाब समीक्षात्मक टिप्पणी हेतु आपको हार्दिक धन्यवाद गीता जी, यह समीक्षा प्रेरणादायी है। जय हो

  2. आपने अपनी कविता के
    माध्यम से दो बातें पहुंचाई हैं
    एक तो किसी की याद में तड़पते हुए उसकी खबर लेने को बेचैन दिल की व्यथा व्यक्त की है..
    और दूसरी ओर आपने
    हवा का दर्द बयां किया है जो मावन द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण से दुःखी है
    एक तरफ भाव कोमल हैं दूसरी तरफ समाज जो संदेश भी दिया जा रहा है…

    1. इस बेहतरीन टिप्पणी हेतु कोटिशः धन्यवाद प्रज्ञा जी, आपकी लेखनी से जो यह अद्भुत शब्द निकले हैं वह प्रेरणादायी हैं, सादर आभार

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