10 Comments

    1. इस प्रेरक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी । उत्साह वर्धन के लिए आभार

  1. नभ से सुर सब देख रहे थे,
    धरा पे कितने दीप जले
    “जय श्री राम”, के उद्घोष से,
    गूंजी अयोध्या, सरयू के तीरे
    लाखों की संख्या दीपों की,
    कौन कहे निशा अमावस की
    जगमग-जगमग हुई अयोध्या….
    बहुत प्यारी कविता

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