खूब दीपक जल रहें हैं

खूब दीपक जल रहें हैं
जगमगाहट सब तरफ है,
खिल रही खुशियाँ अनेकों,
आज रौनक ही अलग है।
धन-धान्य हो भरपूर
सबकी कामनाएं गूंजती हैं,
आज हर घर की उमंगें
लक्ष्मी मां पूजती हैं।
लोक में उल्लास है
बच्चे पटाखों में मगन हैं
घर-घर में गृहलक्ष्मी की
चूड़ियों में
अद्भुत खनक है।
खूब दीपक जल रहें हैं
जगमगाहट सब तरफ है,
खिल रही खुशियाँ अनेकों,
आज रौनक ही अलग है।

Comments

4 responses to “खूब दीपक जल रहें हैं”

  1. Geeta kumari

    “खूब दीपक जल रहें हैं जगमगाहट सब तरफ है,”
    लाजवाब अभिव्यक्ति दिवाली की रौनक का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया है कवि सतीश जी ने । बहुत सुंदर रचना

  2. बहुत खूब सर

  3. खिल रही खुशियाँ अनेकों,
    आज रौनक ही अलग है।
    धन-धान्य हो भरपूर
    सबकी कामनाएं गूंजती हैं,
    यह पंक्तियां मन को छू गईं

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