*भाई-दूज का टीका है*

भाई-दूज का टीका है,
जला दीप भी घी का है
भाई-बहन का पावन प्यार,
जाने है सारा संसार
मात-पिता के बाद भी
मायके में भाई-भाभी,
देते स्नेह लाडली को
भाई ना हो तो सब फीका है
आज भाई दूज का टीका है
बचपन में भाई-बहन,
मिल बांट के खाया करते थे
ससुराल में भी, वही आदत रही
सब मायके से ही सीखा है,
आज भाई दूज का टीका है
जला दीप भी घी का है
गोलों पर टीका करके,
शुभ मनाती भाई का
देखो बहन चली मायके,
रोली, मौली सब लेकर
जला दीप घी का है,
आज भाई दूज का टीका है।।

*****✍️गीता

Comments

13 responses to “*भाई-दूज का टीका है*”

  1. Deepa Sharma

    वाह गीता जी भाई दूज पर बहुत ही शानदार रचना ।

    1. Geeta kumari

      Thank you deepa ji

  2. Seema Chaudhary

    भाई दूज पर भाई बहन का प्रेम दर्शाती हुई बहुत सुंदर कविता

    1. Geeta kumari

      Thank you seema

  3. बहुत खूब, भैया दूज पर बेहतरीन प्रस्तुति

    1. Geeta kumari

      इस समीक्षा गत टिप्पणी हेतु बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी 🙏

  4. आपने तो पूरे भाई दूज के दर्शन ही करा दिये..
    कुछ ऐसा ही होता है यह प्यार

    1. Geeta kumari

      आपकी इस प्यारी सी समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा बहन

  5. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव और सटीक चित्रण जैसे कि बहन भाई को टीका लगा रही हो। सोलह आने यथार्थ

    1. Geeta kumari

      सुन्दर समीक्षा आपका हेतु बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी
      सादर प्रणाम 🙏

      1. हो ललाट चौड़ा अपना
        केसर सिक्त अंगुगिया तेरी।
        विनयचंद गीता बहन ने
        कर दी भरदुतिया तेरी।।

    2. Geeta kumari

      🙏🙏 धन्यवाद भाई जी

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