थकान है मगर दिल को आराम है
आज मन भी बड़ा शान्त है
थोड़ी तसल्ली भी है
तुम्हारे साथ होने की
खुशी भी है
तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर
आज घण्टों रोती रही मैं
सिर तो दुःख रहा है
मगर दिल हल्का भी है
तुमसे जी भर कर कह दी हमने
दिल की बातें
सुकून भी है और बेचैनी भी है..
‘सुकून और बेचैनी’
Comments
8 responses to “‘सुकून और बेचैनी’”
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सुकून और बैचेनी का फ़र्क समझाती हुई कवियित्री प्रज्ञा जी की बहुत सुन्दर पंक्तियां कथ्य और शिल्प बेहद खूबसूरत है । मन के भावों की बहुत ही खूबसूरत अभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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बहुत खूब
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Tq
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बहुत खूब, अति सुन्दर अभिव्यक्ति
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Tq
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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