4 Comments

  1. बहुत ही ह्रदय स्पर्शी रचना है कवि प्रज्ञा जी की ।
    कामकाजी महिलाओं के छोटे बच्चों को ये सब तो सहना ही होता है।
    माँ भी सहती है और बच्चे भी सहते हैं । इस कविता के लिए आपको, मेरा हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा

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