6 Comments

  1. बहुत मार्मिक रचना
    ऐसे बेटे और बहुओं पर शर्म आती है
    और कहा भी गया है कि
    ” कर्म प्रधान विश्व रचि राखा
    जो जस करी सो तस फल चाखा”

    जैसी करनी वैसी भरनी
    उनके बच्चे जैसा करते देखेंगे उनके साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे…

    1. धन्यवाद मैम। मेरी रचना को आपने पढ़ा। समीक्षा तो आपने बहुत ही सुन्दर दी है। आपको मेरी ओर से बहुत शुक्रिया।

  2. बहुत ही करुणा युक्त कहानी है । एक अकेली विधवा स्त्री पर इतने अत्याचार, वो भी उसीके पुत्र के द्वारा ,बहुत ही शर्मनाक व्यवहार
    बहुत ही करुणा से भरी हुई कहानी है

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