*अलविदा*

सर्द मौसम में,
अश्क भी जम गए
अल्फाज उनके सुनकर,
मेरे हर पल थम गए
शून्य में घूमने लगा,
मेरा वजूद सारा
ज़रा सी धूप लगी तो,
नैन हमारे नम गए
अजीब था उनका अलविदा कहना,
कुछ कहा भी नहीं कुछ सुना भी नहीं
बस अलविदा कहा और विदा हो गए,
क्या सच में वो हमसे जुदा हो गए..
______✍️गीता

Comments

5 responses to “*अलविदा*”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  2. बहुत सुंदर और भावपूर्ण रचना
    अलविदा वाह! बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      सराहना हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा जी

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

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