6 Comments

  1. बहुत बहुत शानदार लिखा है शास्त्री जी, वाह वाह
    तेरी परछाई को देख लेता हूँ
    चेहरे को देखने का मौका कहाँ ,
    काबिलेतारीफ पंक्तियाँ

Leave a Reply