उम्मीद

यह जो नाजुक सा दौर है
आहिस्ता आहिस्ता खत्म हो जाएगा
बस उम्मीदों का दीपक तुम
यूं ही आगे भी जलाए रखना।
वीरेंद्र सेन प्रयागराज

Comments

3 responses to “उम्मीद”

  1. वाह वाह क्या बात है

  2. बहुत ख़ूब

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