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  1. “झूठ के भँवर से कैसे निकल पाऊँ
    तुम्हीं अब बता दो
    वो प्रीत कहाँ से लाऊँ।”
    उच्चस्तरीय पंक्तियाँ, उम्दा कवित्व, लाजवाब कविता।

  2. जिन्दगी की सरगम पर
    गीत क्या मैं गाऊँ
    तुम्ही अब बता दो
    वो प्रीत कहाँ से लाऊँ।
    पतझङ सी वीरानी
    छायी है जीवन में

    उत्तम लेखन व भाव प्रगढ़ता के साथ उम्दा शिल्प

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