ठंडी हवा

झूठी हंसी से अच्छा है,
चलो खुल कर रो लेते हैं
बार-बार नजर अंदाज
होने से अच्छा है
कि नज़र आना ही छोड़ देते हैं
रोज़-रोज़ चोट खाने से अच्छा है
कि चलो हम चलना ही छोड़ देते हैं
बाहर ठंडी हवा बहुत ही तेज़ है
चलो हम घर से निकलना ही छोड़ देते हैं
_____✍️गीता

Comments

10 responses to “ठंडी हवा”

  1. बहुत सुन्दर रचना

    1. धन्यवाद संदीप जी

    1. सादर धन्यवाद भाई जी🙏

  2. उत्तम रचना, सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी

  3. This comment is currently unavailable

    1. Geeta kumari

      Thanks bro

  4. सही कहा.
    बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

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