8 Comments

  1. काका हाथरसी के स्टाइल में जीवों पर दया भाव दिखाती हुई कवि सतीश जी की बेहद मार्मिक रचना

  2. मुझे आपकी रचना पढ़कर कबीरदास याद आ गये..
    सही कहा यह बहुत पीड़ादायक है
    बेजुबानों की हत्या करके खुशियां मनाना

  3. क्षुधा मिटाने की खातिर,
    निर्दोषों को है मारा,
    कैसा है शैतान वो मानव,
    जीवों ने लगाया है नारा
    क्षुधा मिटाने की खातिर
    कुदरत ने फल, फूल बनाए हैं
    फिर जीवों को क्यूं मारा जाए
    वो भी तो कुदरत से आए हैं

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