14 Comments

  1. हरित पर्ण हिला-झुला कर,
    दिखा रही है शान अपनी अदाओं की
    कोहरा भी छंट गया,
    कितना स्पष्ट सा दिख गया”
    —- कवि गीता जी की बहुत ही बेहतरीन रचना है यह। अति उत्तम भाव और सहज शिल्प, बहुत खूब

  2. गीता जी को सर्वश्रेष्ठ आलोचक और सर्वश्रेष्ठ सदस्य सम्मान की बहुत बहुत बधाई। वास्तव में आपकी समीक्षा very nice होती हैं। और कविताएं भी उत्तम

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