टिम टिम करते लाखों तारे

टिम टिम करते लाखों तारे
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टिम टिम करते लाखों तारे।
देखो लगते कितने प्यारे।।
सुन्दर आकास सजा है ऐसे।
हीरे-मोती से थाल भरा है जैसे।।

बैठ के अंगना सदा निहारूँ।
एक भी मोती कभी न पाऊँ।।
एक तो आओ मेरे आंगन।
साथ में खेलूँ होय मगन।।

एक तारा जब टूटा था।
शुभ सगुन ये छूटा था।।
एक मनौती पूरण कर दो।
खाली झोली मेरी भर दो।।

चंदा को अपने पास रखो।
चंदा सम वीरा खास करो।।
सबकी मनौती पूरी होती।
तभी तो नाहीं गिनती घटती।।
*********बाकलम*********
बालकवि पुनीतकुमार ‘ऋषि ‘
बस्सी पठाना (पंजाब)

Comments

11 responses to “टिम टिम करते लाखों तारे”

  1. Piyush Joshi

    बहुत खूब, पुनीत

    1. आपके आशीर्वाद का आकांक्षी

  2. बहुत सुंदर, पुनीत की अति सुंदर रचना, वाह, खूब आगे बढ़ो

    1. आपके आशीर्वाद का आकांक्षी ए

  3. Geeta kumari

    चांद और तारों पर बहुत सुंदर बाल रचना लिखी है पुनीत ने।
    Very good Puneet ,keep it up

    1. आपके आशीर्वाद का आकांक्षी

      1. Geeta kumari

        बिल्कुल भाई जी मेरी ओर से शुभाशीष

  4. बहुत सुंदर 👌👌

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