हर मन्दिर को पूजा हमने
भगवान नहीँ मिल पाया है
इस भूल भुलैया सी दुनिया में
इन्सान नहीं मिल पाया है ||
हर व्यक्ति स्वार्थ में डूब रहा
मन डूब गया भौतिकता में
संवेदनाओं का क़त्ल हुआ
झूंठ दगाबाजी करने में
कौन यहाँ पर ज़िन्दा है
मुझे समझ न आया है
इन तथा कथित इन्सानों में
इन्सान नहीं मिल पाया है
हर मन्दिर को पूजा हमने
भगवान नहीँ मिल पाया है
इस भूल भुलैया सी दुनिया में
इन्सान नहीं मिल पाया है ||
रहकर साथ अलग दिखते हैं
दौलत पर इतराते हैं
अपनों को छोड़कर लोग
गैरों को अपनाते हैं
भड़काने को आग विकल है
सबके मन में छुपी जलन है
कलियुग का सब दोष कहूँ क्या
इनकी वाणी में फिसलन है
देवत्व दिला सकने वाला
वह स्वार्थहीन उपकार नहीं मिल पाया है
इन तथा कथित इन्सानों में
इन्सान नहीं मिल पाया है
हर मन्दिर को पूजा हमने
भगवान नहीँ मिल पाया है
इस भूल भुलैया सी दुनिया में
इन्सान नहीं मिल पाया है ||
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