मुस्कुराहट
प्रकृति की
सुबह सुबह दिखती है
उठो जागो
जाग भी जाओ कहती है।
साथ में चिड़ियों की
चहचहाहट भी
संगीत की लय में रहती है।
सुबह
Comments
2 responses to “सुबह”
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प्रातः काल की बेला का बहुत ही सुन्दर चित्रण प्रस्तुत किया है कवि पीयूष जी ने अपनी कविता में। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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बहुत खूब
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