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  1. प्रकृति से दूर हो रहा मानव
    दु:खों से चूर हो रहा मानव,
    वन प्रकृति की आभा बढ़ाते ,
    शुद्ध पवन दे उम्र बढ़ाते
    ———- कवि गीता जी की बहुत सुंदर पंक्तियाँ और बहुत बेहतरीन रचना।

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