उत्तराखंड की ऋषि गंगा में,
ढह गया एक हिम-खंड।
कुछ ही पलों में गिरी हिम-शिला,
और नदिया उफन गई,
ढह गए और बह गए,
उस नदिया में घर कई।
एक सुरंग में काम कर रहे,
श्रमिकों पर टूटा कहर।
करुण क्रंदन और त्राहि-त्राहि की,
आ गई थी एक लहर।
किसी ने अपना बेटा खोया,
किसी का बिछुड़ा भाई है।
एक बुजुर्ग सी दादी गिरकर,
लहरों में समाई है।
रो पड़े परिजन जिन्होंने,
यह आंखों देखी सुनाई है।
हे प्रभु बचाले उन लोगों को,
यह कैसी विपदा आई है ।।
____✍️गीता
यह कैसी विपदा आई है
Comments
8 responses to “यह कैसी विपदा आई है”
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बहुत सुंदर रचना। प्राकृतिक आपदा पर सजीव लेखन
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समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
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अति सुन्दर रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद
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सुन्दर
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धन्यवाद सुमन जी
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सुंदर रचना
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धन्यवाद भाई जी 🙏
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