मै हूँ ना

आज valentine’s day है

मौसम मनचला सा हो रहा है
हर और इश्क खिल उठा है
याद कर रही हूँ
खूबसूरत लम्हों को,
नही, मुझे नही याद आ रही
वो कपड़े, गहने, फूलों की
लम्बी फेहरिस्त….

झंकृत कर रहे है मुझे
वो बेशकीमती पल
जब-जब रूह से रूह
का एकाकार हुआ,
भीड़ में तुम्हारा धीरे से
मेरा हाथ थाम लेना,
घबरा जाना मेरे बीमार होने पर,
समझ जाना अनकही
मेरे मन की बात को,
और मौन नज़रों से
तुम्हारा यह कहना
“मैं हूँ ना”
कर देता है पूर्ण
हमारी प्रेम कहानी को।

Comments

4 responses to “मै हूँ ना”

  1. बहुत ख़ूब

    1. धन्यवाद गीता जी

    1. धन्यवाद जी

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