3 Comments

  1. तुम भी रहे हो बहका
    समझे हो क्यों खिलौना
    मुस्का दो आज फिर से
    मैं तो हूँ, अब कहो ना।
    —– उलाहना से अलंकृत बहुत ही खूबसूरत रचना, भाषा व शिल्प का सुन्दर तालमेल। वाह

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