पारिजात के फूल झरे,
तन-मन पाए आराम वहां।
स्वर्ग से सीधे आए धरा पर,
ऐसी मोहक सुगंधि और कहां।
छोटी सी नारंगी डंडी,
पंच पंखुड़ी श्वेत रंग की।
सूर्य-किरण के प्रथम स्पर्श से,
आलिंगन करते वसुधा का।
वसुधा पर आ जाती बहार,
इतने सुन्दर हैं हरसिंगार।
रात की रानी भी इनका नाम,
ये औषधीय गुणों की खान।
श्री हरि व लक्ष्मी पूजन में होते अर्पण,
इनकी सुगन्ध सौभाग्य का दर्पण।
कितनी कोमल कितनी सुंदर,
इन फूलों की कान्ति है।
इन के सानिध्य में आकर बैठो,
महसूस करो कितनी शान्ति है।
____✍️गीता
पारिजात के फूल
Comments
7 responses to “पारिजात के फूल”
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अतिसुंदर रचना
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बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏
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Very nice
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Thanks for your precious compliment Pragya.
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Welcome
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कौन न प्रकृति सौंदर्य में खो जाते
शायद कोई ऐसा हो जिसे आपकी लेखनी न भाये-
समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद राजीव जी 🙏
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