सब्र की जरूरत है,
समय सब कुछ बदलता है।
परिवर्तनशील इस संसार में,
सांझ तक सूर्य भी ढलता है।
जीवन में श्रेष्ठ कर्म करो,
यह रामायण सिखाती है।
द्वेष,बैर भाव और लालच को,
महाभारत दर्शाती है।
महाभारत ग्रंथ ने इनका,
दुखद परिणाम दिखाया है।
श्री कृष्ण ने दे उपदेश गीता का,
जीवन जीना सिखाया है।।
_____✍️गीता
जीवन
Comments
9 responses to “जीवन”
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सब्र की जरूरत है,
समय सब कुछ बदलता है।
परिवर्तनशील इस संसार में,
सांझ तक सूर्य भी ढलता है।
— आपकी रचना बहुत श्रेष्ठ रचना है। शिल्प व भाषा का सुन्दर समन्वय। जीवन दर्शन से समाहित अद्भुत समन्वय-
आपकी इस उत्कृष्ट और प्रेरक समीक्षा हेतु धन्यवाद करने को शब्द नहीं मिल रहे हैं सतीश जी।इस सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक आभार सर
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद भाई जी 🙏
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धीरज सफलता की कुंजी है
बहुत खूब-
धन्यवाद सर 🙏
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True
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धन्यवाद प्रज्ञा
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Thank You
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