10 Comments

  1. कहे लेखनी मान, बात को यंत्र है तन,
    चला रहा है उसे, सौ तरह से मेरा मन।
    _______ तन को यंत्र और मन को एक सारथी की तरह उस यंत्र को चलाने वाला बताया है कवि सतीश जी ने अपनी इस रचना में,बहुत खूब। छंद युक्त शैली और सुंदर भाव और शिल्प लिए बहुत ही श्रेष्ठ रचना

  2. मन अस्थिर करता मुझे, कैसे हो संतोष,
    खाली खाली आ रहा, खुद ही खुद पर रोष,
    खुद ही खुद पर रोष, नहीं संतोष मुझे है,
    सौ ठोकर के बाद, नहीं फिर होश मुझे है,
    कहे लेखनी मान, बात को यंत्र है तन,

    क्या बात है कवि हो तो ऐसा

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