कर्म कर
तू कर्म कर
कर्म पथ से ना तू भटक
दिशाएं भले विपरीत हों
बोये पथ में शूल हों
ना तू डर और ना हिचक
कर्म कर तू कर्म कर |
कर्म कर तू कर्म कर
Comments
6 responses to “कर्म कर तू कर्म कर”
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सुन्दर कविता
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धन्यवाद
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Nice line
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धन्यवाद
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उम्दा प्रस्तुति
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धन्यवाद
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