सच्चाई की जीत है, सच्ची बातें बोल,
पाप न रख मन में कभी, मन की आंखें खोल।
मन की आंखें खोल, हो सके तो अच्छा कर,
अच्छा होगा सदा, सदा सच की चर्चा कर
कहे लेखनी नहीं छोड़ना तू अच्छाई,
सदा रहेगी साथ, तेरे तेरी सच्चाई।
नहीं छोड़ना तू अच्छाई
Comments
8 responses to “नहीं छोड़ना तू अच्छाई”
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Your poem is very beautiful
Creation inspired to walk in the path of truth…-
Thanks
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“सच्चाई की जीत है, सच्ची बातें बोल,
पाप न रख मन में कभी, मन की आंखें खोल।
********सच्चाई की राह पर चलने के लिए प्रेरित करती हुए कवि सतीश जी की बहुत ही उत्कृष्ट रचना है। उत्तम भाव और सुंदर शिल्प के साथ छंद शैली में बहुत ही सुन्दर रचना।-
इस बेहतरीन समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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बहुत खूब
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बहुत धन्यवाद
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