4 Comments

  1. शिशु सुधार की चाह में रहते हर जन
    खुद चाहे रहा बिकर्षित उनका जीवन
    ब्यर्थ चिंतित हो उल्झाता जन निज मन
    धरा अवतरण हेतु सबका

    बहुत खूब शिशु सुधापने के ल्ए स्वयं सुधरना आवश्यक है

Leave a Reply