नींद में इस कदर न खो जाओ
ओ युवा! श्रम करके बढ़ जाओ,
छोड़ आलस्य की सभी बातें,
कर्म करने की ओर लग जाओ।
भूख मेहनत की आज सोने न दे,
हौसला एक पल भी खोने न दे,
प्यार की पेटियां भरी हों सब,
नफरतों का जमाव होने न दे।
श्रम करने की ओर
Comments
8 responses to “श्रम करने की ओर”
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वाह बहुत खूब
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JAY ram JEE ki
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वाह बहुत खूब कविता
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परिश्रम और कर्म करने के लिए प्रेरित करती हुई कवि सतीश जी छंद शैली में बहुत उम्दा प्रस्तुति। अति सुन्दर रचना
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बहुत सुंदर
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बहुत बढ़िया,शानदार
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बहुत खूब
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परिश्रम करके आगे बढ़ने को प्रेरित करती हुई रचना
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