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  1. चादर जितने पांव पसारो,
    पांव अपने ना कटाओ तुम।।
    अपनी मेहनत से चांद पकड़ो,
    उसे नीचे ना गिराओ तुम।
    —— बहुत ही लाजवाब पंक्तियाँ। बहुत सुंदर कविता।

  2. चादर जितने पांव पसारो,
    वहीं शांति का डेरा है।।
    ________अपनी सामर्थ्य अनुसार रहने की सुन्दर प्रेरणा देती हुई बहुत ही उत्तम रचना

  3. अभिलाषा और ईर्श्या में,
    रात-दिन सा अंतर जानो तुम।
    अभिलाषा मजबूत रखो,
    ईर्श्या से दिल ना जलाओ तुम।।

    चादर जितने पांव पसारो,
    पांव अपने ना कटाओ तुम।।

    बहुत ही सुंदर रचना

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