Rakesh Saxena's Posts

जीभ महान्

हिम्मत तो देखो ज़ुबान की, कैंची जैसी चलती है, बत्तीस दांतों घिरी होकर भी निडर हो मचलती है। बिना हड्डी की मांसल जीभ, कई कमाल करती है, फंसा दांत में तिनका, निकाल के ही दम भरती है।। दुनियां भर के स्वाद का, ठेका जुबां ने ही ले रखा, मजबूत दांतों के झुंड को गुलाम जुबां ने बना रखा। पहले चखती फिर कहती, ये खा और वो मत खा, बीमारी हो या चिढ़ाना, पहली हरकत जीभ दिखा।। द्रोपदी की जुबान ने ही, महाभारत करवाया था,... »

लापरवाही – व्यंग्य

लाख समझाने पर भी, गली-बाजार में भीड़ करें, बिना मास्क खुल्लमखुल्ला सबसे वार्तालाप करें। सेनेटाइजर का इस्तेमाल, हाथ धोना भी बंद करें, आओ साथी हम भी मरें, औरों का इंतजाम करें।। बार-बार हाथ धो कर, समय क्यों बर्बाद करें, हैंड सेनेटाइजर से हाथ, क्यों अपने खराब करें। मास्क पहनकर अपनी, सुन्दरता क्यों नष्ट करें, आओ साथी हम भी मरें, औरों का इंतजाम करें।। ज़ुखाम खांसी बुखार को, हम नज़रअंदाज़ करें, अपनी बीमा... »

राधे कृष्ण सा प्रेम धागा

हवा में उड़ाओ पतंग, खुद को जमीं पे खड़ा रखो। दान धर्म करके बंधुवर, अपना दिल भी बड़ा रखो। घमण्ड रुपी पतंग कटवाकर, सपनों को बुलंद रखो। रंग-बिरंगी पतंगों जैसा , परचम अपना लहराए रखो। धागे अनेक रंगों के, पकड़ मजबूत बनाए रखो। कच्चा हो या पक्का धागा, उलझने से बचाए रखो। प्रेम का धागा पक्का होता, उसपे विश्वास बनाए रखो। राधा-कृष्ण सा प्रेम धागा, दिल में सदा संजोए रखो। घर, परिवार, यार, दोस्त सबको धागे से बां... »

बम लहरी, बम बम लहरी

बम लहरी, बम बम लहरी (शिव महोत्सव विशेष) शिव शम्भू जटाधारी, इसमें रही क्या मर्जी थारी, सर पे जटाएं, जटा में गंगा, हाथ रहे त्रिशूलधारी। गले से लिपटे नाग प्रभू, लगते हैं भारी विषधारी, असाधारण वेश बना रखा, क्या रही मर्जी थारी।। भुत-प्रेत, चांडाल चौकड़ी, करते सदा पूजा थारी, राक्षस गुलामी करते सारे, चमत्कारी शक्ति थारी। शिवतांडव, नटराज नृत्यकला नहीं बराबरी थारी, मस्तक त्रिनेत्र खुले तो प्रभू, हो जाए प्र... »

बम लहरी, बम बम लहरी

बम लहरी, बम बम लहरी (शिव महोत्सव विशेष) शिव शम्भू जटाधारी, इसमें रही क्या मर्जी थारी, सर पे जटाएं, जटा में गंगा, हाथ रहे त्रिशूलधारी। गले से लिपटे नाग प्रभू, लगते हैं भारी विषधारी, असाधारण वेश बना रखा, क्या रही मर्जी थारी।। भुत-प्रेत, चांडाल चौकड़ी, करते सदा पूजा थारी, राक्षस गुलामी करते सारे, चमत्कारी शक्ति थारी। शिवतांडव, नटराज नृत्यकला नहीं बराबरी थारी, मस्तक त्रिनेत्र खुले तो प्रभू, हो जाए प्र... »

चिंता से चिता तक

मां बाप को बच्चों के भविष्य की चिन्ता, महंगे से स्कूल में एडमिशन की चिन्ता। स्कूल के साथ कोचिंग, ट्यूशन की चिन्ता, शहर से बाहर हाॅस्टल में भर्ती की चिन्ता।। जेईई, नीट, रीट कम्पीटीशन की चिन्ता, सरकारी, विदेशी कं. में नौकरी की चिन्ता। राजशाही स्तर का विवाह करने की चिंता, विवाह पश्चात विदेश में बस जाने की चिंता।। फर्ज निभाकर अब कर्ज चुकाने की चिंता, बुढ़ापे तक कोल्हू में फंसे रहने की चिंता। बच्चों के... »

जाने तुम कहां गये

अरमानों से सींच बगिया, जाने तुम कहां गए। अंगुली पकड़ चलना सीखाकर, जाने तुम कहां गए।। सच्चाई के पथ हमको चलाकर, जाने तुम कहां गए। हमारे दिलों में घर बनाकर, जाने तुम कहां गए।। तुम क्या जानो क्या क्या बीती, तुम्हारे बनाए उसूलों पर।। वृद्धाश्रम में मां को छोड़ा, बेमेल विवाह मेरा कराया। छोटे की पढ़ाई छुड़ाकर, फैक्ट्री का मजदूर बनाया।। पुश्तेनी अपना मकान बेच, अपना बंगला बना लिया। किस्मत हमारी फूटी निकली,... »

भ्रम

हम भ्रम पाल लेते हैं, “मैंने ही उसे बनाया है”, कभी सोचा तूने, भू-मण्डल किसने बसाया है। भाई ये सब कर्मानुसार ही, ब्रह्मा की माया है, कोई सूरमा आज तक, अमर नहीं हो पाया है।। »

बेटी

गांव गांव में मारी जाती, बेटी मां की कोख की, बेटी मां की कोख की, बेटी मां की कोख की।। जूही बेटी, चंपा बेटी, चन्द्रमा तक पहुंच गई, मत मारो बेटी को, जो गोल्ड मेडलिस्ट हो गई, बेटी ममता, बेटी सीता, देवी है वो प्यार की। बेटी बिन घर सूना सूना, प्यारी है संसार की, गांव गांव में मारी जाती, बेटी मां की कोख की।। देवी लक्ष्मी, मां भगवती, बहन कस्तूरबा गांधी थी, धूप छांव सी लगती बेटी, दुश्मन तूने जानी थी। कल्प... »

‘‘फितरत’’

हे मानव तेरी फितरत निराली, उलट पुलट सब करता है, बंद कमरे में वीडियो बनाकर, जगजाहिर क्यों करता है? शादी पार्टी में खाना खाकर, भरपेट झकास हो जाता है, बाहर आकर उसी खाने की, कमियां सबको गिनाता है जिस मां की छाती से दूध खींच, बालपन में तू पीता है उसी मां को आश्रम में भेजकर, चैन से कैसे तू जीता है बचपन में तू जिद्द करके अपनी, हर बात मनवाता है बुढ़े माॅ-बाप की हर इच्छा को, दरकिनार कर जाता है मां, बहन, बेट... »

भटके हुए रंगों की होली

आज होली जल रही है मानवता के ढेर में। जनमानस भी भड़क रहा नासमझी के फेर में, हरे लाल पीले की अनजानी सी दौड़ है। देश के प्यारे रंगों में न जाने कैसी होड़ है।। रंगों में ही भंग मिली है नशा सभी को हो रहा। हंसी खुशी की होली में अपना अपनों को खो रहा, नशे नशे के नशे में रंगों का खून हो रहा। इसी नशे के नशे में भाईपना भी खो रहा।। रंग, रंग का ही दुश्मन ना जाने कब हो गया। सबका मालिक ऊपरवाला देख नादानी रो गया,... »

फुलझडियां

मनचले ने रुपसी पर, तंज कुछ ऐसा गढ़ा, काश जुल्फ़ों की छांव में, पड़ा रहूं मैं सदा। रुपसी ने विग उतार, उसे ही पकड़ा दिया, ले रखले जुल्फ़ों को तू, पड़ा रह सदा सदा।। फेसबुक की दोस्त को, बिन देखे ही दिल दे दिया, जो भी मांगा प्रेयसी ने, आॅनलाईन ही भेज दिया। एकदिन पत्नी के पास वही गिफ्ट देख चौंक गया, उसकी पत्नी ही फ्रेंड थी, बेचारा मूर्छित हो गया।। पत्नी से प्रताड़ित पति ने ईश्वर को ताना दिया, क्या पाप क... »

बस एक दिन याद करो

26 जनवरी, 15 अगस्त, देश भक्ति जगाओ, झण्डे फहराओ, बलिदान पर “उनके”, तुम इतराओ, फिर भूल जाओ भूल जाओ।। नारी दिवस, बालिका दिवस, कविता सुनाओ, मंच सजाओ, मौका मिले तो दानव बन जाओ, फिर भूल जाओ भूल जाओ।। जन्माष्टमी हनुमान जयंती, दुर्गा अष्टमी, गणेश चतुर्थी, झांकी सजाओ त्योहार मनाओ, गो माता का अपमान करो, दर से भिखारी भूखा भगाओ।। रामायण गीता जी पाठ कराओ, दशहरा आया, रावण जलाओ, अपने अंदर रावण पनपाओ... »

आंदोलन

भूमिपुत्र किसान भाई, तुम जिद्द अपनी छोड़ दो धरना प्रदर्शन की दिशा भी घर की तरफ मोड़ दो देश पर मण्डरा रहे ख़तरे को गम्भीरता से भांप लो तुम्हारी आड़ में मचा आतंक अब तुम पहचान लो किसान भाई कोई शक नहीं, व्यथा तुम्हारी सच्ची है आंदोलन तुम्हरा हाईजेक हुआ खबर ये भी पक्की है तुम किसान भोले भाले, दुश्मन चंट और चालाक है देश के अंदर और बाहर, हर तरफ गम्भीर हालात हैं रंगे सियार जैसे दुश्मन अंधेरा हर ओर तलाश रह... »