5 Comments

  1. बच्चे को प्रोत्साहित करना,
    इसी में है सबकी भलाई।
    हतोत्साहित ना करना उनको,
    उनकी किशोरावस्था है आई।
    ——– कवि गीता जी की नजर से जीवन का कोई भी कोना अछूता नहीं। कितना सुंदर वर्णन किया गया है। काबिलेतारीफ रचना है।

  2. इस बेहतरीन और लाजवाब समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी। प्रोतसाहन हेतु हार्दिक आभार

  3. प्री बोर्ड की परीक्षा का,
    परिणाम जब आया
    उसने अपेक्षा से कम ही अंकों को पाया।
    “क्यों अंक अच्छे नहीं आए हैं तेरे”
    वह खाता था डाँट पिता से साँझ और सवेरे।

    बच्चो को प्रोत्साहित करना ही अच्छा है
    यही कहती रचना

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