*होली पर*

आज होली पर,
देख आली चाॅंद पूरा हो गया l
छिड़क रहा है रजत धरा पर,
उसका ख्वाब पूरा हो गया l
सितारे भी मुस्कुराते से प्रतीत हो रहे
अंधियारी राहों में,
देख उजाला हो गया l
चाॅंदनी रात आई है,
हर्ष की सौगात लाई है l
होली के पावन पर्व पर,
लोक आलोकित हो गया॥
____✍गीता

Comments

15 responses to “*होली पर*”

  1. Beautiful thought beautiful poem

    1. Geeta kumari

      Thank you very much

      1. वेलकम

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत आभार पीयूष जी

  2. अति सुन्दर

    1. Geeta kumari

      हार्दिक धन्यवाद कमला जी

  3. Satish Pandey

    चाॅंदनी रात आई है,
    हर्ष की सौगात लाई है l
    होली के पावन पर्व पर,
    लोक आलोकित हो गया॥
    —— लेखन की विलक्षण प्रतिभा। एक उच्चस्तरीय कवि की बेहतरीन कविता।

    1. Geeta kumari

      उत्साह प्रदान करने वाली समीक्षागत शक्ति को प्रणाम एक श्रेष्ठ कवि द्वारा दिए गए इतने प्रोत्साहन को मेरा अभिवादन…

  4. बहुत सुंदर

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद सर

  5. vikash kumar

    चाॅंदनी रात आई है,
    हर्ष की सौगात लाई है l
    होली के पावन पर्व पर,
    लोक आलोकित हो गया॥
    ____✍गीता
    Great बहुत बढ़िया

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद विकास जी

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

Leave a Reply

New Report

Close