सब कुछ झूठा

सूरज जलकर
कब रोया
संध्या रातों मे
कब सोई
गुलमोहर का
साख से झरना
कब बंद हुआ
दशरथ माझी का
हथौड़ा कब बंद हुआ,
क्यों रोता है मूरख बंदे
सत्य प्रकृत ,
प्रकृत अनोखा,
बस लड़ना सीख
सब कुछ झूठा
………………
कवि ऋषि कुमार प्रभाकर

Comments

3 responses to “सब कुछ झूठा”

  1. Geeta kumari

    सूरज जलकर
    कब रोया
    संध्या रातों मे
    कब सोई
    _________ कवि ऋषि जी की प्रकृति के बारे में बताती हुई बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति , उत्तम लेखन

    1. सुंदर समीक्षा के लिए ह्रदय से धन्यवाद

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