सच्चा साथी

सच्चा साथी वही है,
जो दुःख में भी साथ दे।
हृदय में हो जब संताप,
हाथ बढ़ाकर हाथ दे।
अमावस सी काली रातों को,
जो बना दे चाॅंद रात।
ह्रदय में जब शूल चुभें,
वो फूल खिला दे मन..
“मैं हूँ ना” कहकर,
मिटा दे सारे ग़म।
____✍गीता

Comments

11 responses to “सच्चा साथी”

  1. अति सुंदर रचना

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद चंद्रा जी हार्दिक आभार मैम

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत खूब

    1. बहुत-बहुत शुक्रिया भाई जी🙏

  3. Seema Chaudhary

    अमावस सी काली रातों को,
    जो बना दे चाॅंद रात।
    **
    वाह बहुत खूब ,गीता जी की बहुत सुंदर कविता

    1. Geeta kumari

      उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद सीमा जी

  4. Satish Pandey

    ह्रदय में जब शूल चुभें,
    वो फूल खिला दे मन..
    “मैं हूँ ना” कहकर,
    मिटा दे सारे ग़म।
    — वाह अतिसुन्दर रचना। बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी अभिवादन सर

  5. सच्चा साथी वही है,
    जो दुःख में भी साथ दे।
    हृदय में हो जब संताप,
    हाथ बढ़ाकर हाथ दे।
    अमावस सी काली रातों को,
    जो बना दे चाॅंद रात।

    सच्ची मित्रता को परिभाषित करती रचना

    1. Geeta kumari

      समीक्षा के लिए धन्यवाद प्रज्ञा जी

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