हरियाली और खुशहाली रहे

मेरा भारत मेरा देश
उन्नति को बढ़े,
हर तरफ हरियाली
और खुशहाली रहे।
दूध की नदियां बहें
खेत सोना उगल दें,
मेघ जल वर्षा करें,
वृद्धजन हर्षा करें,
युवा मंजिल को पायें
हर घड़ी मुस्कुराएं,
धर्म पथ पर चलें सब
कर्म पथ पर चलें सब।
न भूखा कोई सोये
सभी के तन वसन हों
न टूटें दिल किसी के
सभी के सब मगन हों।
पेड़ फल से लदे हों
स्रोत जल से भरें हों
नैन हों झील जैसे
नील जल से भरे हों।
मेरा भारत मेरा देश
उन्नति को बढ़े,
हर तरफ हरियाली
और खुशहाली रहे।

Comments

10 responses to “हरियाली और खुशहाली रहे”

  1. वाह, अति उत्तम रचना

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. बहुत सुंदर भाव

    1. सादर धन्यवाद

  3. बढ़िया और शानदार रचना

    1. सादर आभार

  4. Geeta kumari

    मेरा भारत मेरा देश
    उन्नति को बढ़े,
    हर तरफ हरियाली
    और खुशहाली रहे।
    दूध की नदियां बहें
    खेत सोना उगल दें,
    ____________ पूरी कविता इतनी सुंदर है की समझ ही नहीं आ रहा कौन कौन सी पंक्तियों को हाईलाइट करूँ। भारत देश की उन्नति, वृद्धजनों की खुशियां और देश के सभी लोगों की खुशहाली की कामना करती हुई अत्यंत श्रेष्ठ रचना, अति उत्तम लेखन।

    1. इस बेहतरीन समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी। आपकी समीक्षा प्रेरणादायक है।

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