10 Comments

  1. आज जब-जब भी याद बचपन को करती हूँ,
    माँ-पापा की सूरत ही सामने आती रहती।
    —– बहुत ही सुन्दर और उच्चस्तरीय रचना।

    1. उत्साह वर्धन करने वाली और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी, अभिवादन सर

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