दसो दिशाओ मे
बड़े बड़े मोटे मोटे अजगर
पड़े हैं तैयार
उत्सुक हैं निगल जाने को संसार
वो हमारे पास भी आते हैं
और कभी हम अपने काम से उनके पास चले जाते हैं
इस प्रकार वो अपना संगठन चलाते हैं
निर्दोष जान गवाते हैं
और वो पैसा कमाते हैं
पैसा से ये नर भक्षी दानवो का परिवार चलाते हैं
अक्सर अनचाहे अजगर ये एक न एक दिन मिल ही जाते हैं
अजगर
Comments
3 responses to “अजगर”
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Thoughtful poetry
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धन्यवाद
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बहुत सुंदर
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