रौशनी…

नई रौशनी कर रही है
तेरा इंतजार यॅंहा ।
तू है वहाॅं,
उसे भी तेरा इंतजार है।
आजा लौट कर,
बहुत सुनहरी दुनियाँ है,
तेरे लिए सजाया है
प्रभु ने सुखद संसार यहाँ॥
____✍गीता

Comments

6 responses to “रौशनी…”

  1. vikash kumar

    Great poem

  2. बहुत सुंदर

  3. Amita

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  4. Rajeev Ranjan Avatar
    Rajeev Ranjan

    आएगा लौटकर वो
    बस इक सूचना है
    जीवन सदा है लेकिन
    रूप बदलना है
    कभी न कभी चलना है
    इक पूर्व सूचना है

  5. Rajeev Ranjan Avatar
    Rajeev Ranjan

    सुंदर अभिव्यक्ति, गीता जी

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