“सुख की प्राप्ति”

आज अर्ध-निद्रा में ही
कुछ जागने की चेष्टा की
जाने कितनी दूर चलकर
मैं जाने कहाँ पहुँच गई !
अर्द्ध विक्षिप्त अवस्था में,
देखा तो हजारों पुष्प
सोने के सरोवर में स्नान करके
पूजा करने जा रहे हैं
माँ गौरी की पूजा
मैने भी उस स्वर्ण सरोवर में
स्नान किया और
पूजा की,
मन को शांति मिली
सुख की प्राप्ति हुई।।

Comments

6 responses to ““सुख की प्राप्ति””

  1. Amita

    उत्कृष्ट रचना

    1. Pragya

      धन्यवाद

  2. Anil Mishra Prahari

    बहुत सुन्दर रचना।

  3. Ekta

    बहुत खूब

    1. आभार आपका 

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